ਲੇਖਕ

ਪੰਜਾਬੀ ਸੱਭਿਆਚਾਰ

ਰਸੋਈ ਘਰ

ਅਕਾਲ ਤਖਤ ਅਤੇ ਜਥੇਦਾਰ

ਚਰਨਜੀਤ ਸਿੰਘ ਬਲ

ਮਲਹਾਰ ਸਿੰਘ ਜਰਮਨੀ

ਜਤਿੰਦਰ ਪੰਨੂ

ਦੇ ਲੇਖ ਪੜਨ ਲਈ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ

ਸੁਰਜੀਤ ਪਾਤਰ

ਦੇ ਲੇਖ ਪੜਨ ਲਈ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ

ਇਕਬਾਲ ਰਾਮੂਵਾਲੀਆ

ਦੇ ਲੇਖ ਪੜਨ ਲਈ ਇਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ

ਉਜਾਗਰ ਸਿੰਘ

ਦੇ ਲੇਖ ਪੜਨ ਲਈ ਇਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ

ਤਰਲੋਚਨ ਸਿੰਘ ਦੁਪਾਲਪੁਰੀ

ਦੇ ਲੇਖ ਪੜਨ ਲਈ ਇਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ

ਅੰਜੂਜੀਤ ਸ਼ਰਮਾ

ਦੇ ਲੇਖ ਪੜਨ ਲਈ ਇਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ

ਡਾ.ਮਲਕੀਅਤ ਸਿੰਘ ਸੁਹਲ

ਦੇ ਲੇਖ ਪੜਨ ਲਈ ਇਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ

ਸ:ਰਵੇਲ ਸਿੰਘ ਇਟਲੀ

ਦੇ ਲੇਖ ਪੜਨ ਲਈ ਇਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ

ਐਸ ਸੁਰਿੰਦਰ ਇਟਲੀ

ਦੇ ਲੇਖ ਪੜਨ ਲਈ ਇਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ

ਸ:ਧਿਆਨ ਸਿੰਘ ਰਾਏ

ਦੇ ਲੇਖ ਪੜਨ ਲਈ ਇਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ

ਇੰਦਰ ਜੀਤ ਸਿੰਘ ਬੇਕਸ ਕਲੋਨ (ਜਰਮਨੀ)

ਦੇ ਲੇਖ ਪੜਨ ਲਈ ਇਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ

ਇਕਵਾਕ ਸਿੰਘ ਪੱਟੀ

ਦੇ ਲੇਖ ਪੜਨ ਲਈ ਇਥੇ ਕਲਿੱਕ ਕਰੋ

ਨਰਿੰਦਰ ਸਿੰੰਘ ਸੰਧੁ ਬਟਾਲਾਵੀ

ਕੁਲਵੰਤ ਸਿੰਘ ਕਾਵੈਂਟਰੀ, ਯੂ ਕੇ

 
 
 
 
ਸਿਹਤ ਖਜ਼ਾਨਾ

मेरे मरने के बाद

June 02, 2018 12:36 PM

01 अगस्त की बात है रात को करीब 2.00 बजे के आस पास अचानक मुझे पसीना आने लगा और दिल में बहुत तेज दर्द होने लगा मैं तड़पने लगा और जोर से चीख कर बेहोश हो गया I अचानक मेरी आँख खुली तो मैंने देखा की मैं अल्केमिस्ट हॉस्पिटल में बिस्तर पर पड़ा हूँ और मेरे ऊपर एक सफ़ेद चादर मुहं तक ढकी हुई है | डॉक्टर बाहर जा रहे हैं, मैं भी उनके पीछे चल दिया | बाहर आकर डॉक्टर ने लोगों को बताया की वो मुझे बचा नहीं पाये | सब लोग रोने लगते हैं और मेरे शरीर को घर ले आते हैं |

लेखक - अजय गुप्ता

सुबह हो चुकी है , अरे ये क्या , ये तो मजा आ गया , मेरे अंदर कुछ नयी शक्तियां आ गयी हैं | अब मैं कही भी जा सकता हूँ, उड़ सकता हूँ और लोगों के दिलों की बात जान सकता हूँ | मैंने सोचा चलो मजा लिया जाये , में अपनी बीबी की तरफ देखा वो औरतों के बीच में बैठी थी और सोच रही थी " मैंने पहले ही मना किया था कम खाया करो, वाक किया करो , परन्तु इन्होने मेरी कोई बात नहीं मानी और हमे अकेला छोड़ कर चले गए| अब मैं अपनी बेटी को कैसे पालूंगी , कौन इस की शादी करेगा,  घर का खर्चा कैसे चलेगा | खुद तो चले गए , अब मैं अकेले सब कुछ कैसे सम्भालूंगी | इस से अच्छा तो भगवन मझे उठा लेते | "  तभी मेरी बेहोश पड़ी बेटी को होश आ जाता है और वो जोर जोर से रोने  लगती है | मेरे शरीर से चिपट जाती है " उठो पापा , अपनी बेटी के कहने से एक बार उठ जाओ , अपनी लाड़ली का कहना सुनो | में आप का ख्याल रखूंगी , मेरे पास वापस आ जाओ पापा | आप तो कहते थे की जब मेरी बेटी शादी कर के विदा होगी, सब से ज्यादा मैं रोऊंगा | पर  आप तो अपनी लाड़ली को ही रुला रहे हो | पापा मैं आप के बिना नहीं रह सकती , में खाना  नहीं खाऊँगी, पानी भी नहीं पियूंगी | मुझे तो सिर्फ मेरे प्यारे पापा चाहियें | मुझे अपनी गोदी में लो पापा , अपनी बेटी को अकेला छोड़ कर मत जाओ पापा " और ये कहते कहते वो फिर रोने लगी,  मेरे चेहरे पर प्यार करने लगती है |  मैं हाथ बढाता हूँ उसे चुप करने के लिए , पर मेरा हाथ उस के आर पार हो जाता है | मैं रोते-रोते बाहर आ जाता हूँ | बाहर कुछ लोग चुपचाप खड़े है , थोड़ी दूरी पर मेरे ऑफिस के आस-पास के कुछ लोग खड़े बातें कर रहे हैं |

 

पहला - मार्किट के लोगों को फ़ोन कर के बता दो की अकाउंटेंट की डेथ हो गयी है  और ये बताओ की मार्किट का क्या करना है |

दूसरा - मार्किट अंतिम संस्कार होने तक बंद कर देते है |

तीसरा - नहीं यार संस्कार होने में तो अभी बहुत टाइम है, लोग नहीं मानेगें, बहुत नुक्सान हो जायेगा सबका |

दूसरा - पर यार लोग क्या कहेंगे , मार्किट में डेथ हो गयी है और मार्किट खुली हुई है |

पहला - बात तो ठीक है , कोई ऐसा रास्ता निकालो की नुकसान भी न हो और लोगों बुरा भी न लगे |

दूसरा - एक काम करते हैं सब दुकाने बंद कर के दुकानो के आस पास ही खड़े रहतें है , कस्टमर आएगा को थोड़ा सा शटर खोल के सामान दे देंगे.

तीसरा - भाई मैं तो दुकान बंद कर दूंगा , बीबी बहुत दिनों से कह रही है , कपड़ों की सेल ख़तम को जाएगी , में तो शॉपिंग पर जाऊंगा |

दूसरा - चलो अजय के मरने से ये फायदा तो हुआ की पैंडिंग काम करने का टाइम मिल गया, हा-हा-हा |.

तीसरा - हा-हा-हा, यार यहाँ मत हंस , अच्छा नहीं लगता लोग क्या कहेंगे |

दूसरा - सॉरी यार मैं भूल गया था |

 

ये बाते सुन कर मैं पडोसी के घर गया तो उसकी बीबी उसे कह रही थी की गली वाले गुप्ता की डेथ हो गयी है , वहां जाओगे क्या . वो बोला डार्लिंग मैं तो उसे ज्यादा नहीं जनता , सिर्फ मंदिर जाते हुए कभी कभी राम राम होती है,  वैसे भी मुझे आज स्टाफ मेंबर्स के साथ ट्रेड फेयर जाना है | उस की पत्नी बोली , ऐसे अच्छा नहीं लगता , २ मिनट के लिए तो चले जाओ | जानू एक  बात बताओ " जो आया है , उसे एक न एक दिन तो जाना ही है , अब अगर मैं सब के मरने पर जाने लगा तो पूरी जिंदगी श्मशान में ही रह जाऊंगा और वैसे भी अगर मैं नहीं गया तो किसी को क्या पता चलेगा | तुम एक काम करना , जब सारे शमशान जाने लगें तो 5 मिनट के लिए चले जाना , हाजरी लग जाएगी , और अगर कोई मेरे बारे में पूछे तो कह देना मम्मी बहुत बीमार है , में उन्हें अस्पताल ले कर गया हूँ ".

 

अब मुझे थोड़ी नींद आने लगती है , में वहीँ अपने घर के सामने पेड़ पर बैठ कर सो जाता हूँ | बॉडी को यहाँ रखो , बॉडी को कफ़न ढक दो , आदि आवाजें सुन कर मेरी नींद खुलती है | मेरे प्यारे सुन्दर शरीर को चारों तरफ से मेरे रिश्तेदारों ने घेर रखा होता है , परंतू ये क्या सब मुझे बॉडी कह रहें हैं | कोई मुझे मामा, चाचा, ताऊ, मौसा , फूफा , जानू या दोस्त नहीं कह रहा , सब को जल्दी है मेरे शरीर को श्मशान ले जाने की. " अरे रुको मैं अपना घर छोड़ के नहीं जाना चाहता, इसे मैंने बड़ी मुश्किल से बनाया है , अरे कोई मुझे कपडे तो पहना दो, अगर ये सफ़ेद चाद्दर हट गयी तो मैं नंगा हो जाऊंगा | " पर मेरी बात कोई नहीं सुन रहा | मैं रोने लगता हूँ " मुझे नहीं जाना , मैं नहीं जाऊंगा | अभी तो मेरी बेटी सिर्फ 15 साल की है , वो मेरे बिना नहीं रह सकती | तुम मुझे ले गए तो गंदे लोगों से उस की रक्षा कौन करेगा | ये तो मेरी एकलौती बेटी है | कम से कम इस की शादी तक तो रुक जाओ | अरे इस के लिए कौन लड़का ढूंढेगा | जब इस की सास इसे परेशान करेगी तो कौन उस से लड़ने जायेगा | नहीं मुझे मत ले कर जाओ , मैं अपनी बेटी के बिना नहीं रह सकता , मुझे नहीं जाना मैं आप सब के हाथ जोड़ता हूँ , पैर पड़ता हूँ , मुझे मत ले कर जाओ |   परन्तु मेरी बात कोई नहीं सुनता |  सब घड़ी देख रहे हैं , तभी कोई बोला, जल्दी करो " सूरज ढलने से पहले ही अंतिम संस्कार करना जरुरी है नहीं तो लाश को पूरी रात घर में रखना पड़ेगा , ज्यादा देर हो गयी तो लाश में से बदबू आने लगेगी ",  और लोगों ने मुझे कंधो पर उठा  लेते हैं |

 

" राम नाम सत्य है, सत्य बोलो गत है " , मैं फिर जोर-जोर से रोने लगा " नहीं मुझे नहीं जाना , मेरे बाद  मेरी बेटी का क्या होगा, कौन उस का ख्याल रखेगा , मुझे छोड़ दो , मुझे नहीं जाना" पर मेरी कोई नही सुनता और घर से चल पड़ते हैं.  भीड़ में पीछे मेरे कुछ क्लाइंट भी हैं .

 

राम इंटरनेशनल : बताओ कितने गलत टाइम पर मर गया , अगर दो दिन और रुक जाता तो कम से कम मेरी बैलेंस शीट तो पूरी कर देता |

गोपाल हार्डवेयर : अरे तुझे तो अपनी बैलेंस शीट की पड़ी है , मुझसे तो दो दिन पहले ही 15000 रपये एडवांस लिए थे , मेरा तो पैसों का नुकसान हो गया |

राम इंटरनेशनल : कोई बात नही सोच ले 15000 रुपए दान कर दिये |

गोपाल हार्डवेयर : हाँ अब तो यही सोच कर तसल्ली करनी पड़ेगी , इस की बीबी तो देने से रही |

कृष्णा क्रिएटर्स : क्या देने से रही , हा - हा- हा |

राम इंटरनेशनल : चुप कर ******* , तुझे यहां भी यही सब सूझ रहा है. हीं - हीं - हीं |

 

इतने में हम मंदिर के बाहर आ गए . वहां एक जवान लड़का भीख मांग रहा था , साथ में उसकी 8 साल की बच्ची भी थी | मेरा दोस्त श्याम लाल  बोला शर्म नहीं आती, हट्टा-कट्टा हो कर भीख मांगता है | इस पर भिखारी बोला , क्या करूँ  बाबूजी , 12 साल पहले दिवाली पर पटाखा आँख में लगने से अँधा हो गया था  , बहुत कोशिश की , बहुत इलाज कराया , पर ठीक नही हो पाया | डॉक्टर कहतें हैं की यदि कोई व्यक्ति मरने के बाद आँखे दान कर देगा तो मेरे आँखों की रौशनी वापस आ जाएगी | पर बाबूजी 12 साल हो गए मुझे आँखे नहीं मिली.

श्याम लाल - भई जब आँखे चली गयी थी तो बच्चे पैदा करने जरूरी थे क्या , खुद तो भूखा मर ही रहा था , इसे भी मरने की लिया पैदा कर दिया.इस पर भिखारी बोला " बाउजी ये मेरी बच्ची नहीं है , इस बच्ची की माँ भी 6  साल पहले मर गयी थी , बेचारी अनाथ हो गयी | अब मै ही किसी तरह इसे पाल रहा हूँ | " ये बात सुन कर श्याम लाल उसे 200  रूपये दे देता है " अच्छा ये ले और हाँ इन पैसों से शराब मत पी लियो |  

 

और लो अब हम शमशान में आ गए| यहां कुछ लोग पहले से ही हमारा इंतजाम कर रहे हैं. सब लोग मुझे लकड़ियों पर लिटा देते हैं | कुछ लोग आपस में बातें कर रहें हैं

 

अरुण : पता चला डेथ कैसे हुई |

अविन्दर : नही , कुछ पता नही चला , रात तो सीने में दर्द हुआ और बस 3 घंटे में ही डेथ हो गयी |

अरुण : इसका मतलब डेथ हार्ट-अटैक की वजह से हुई है |

अविन्दर : ओ नहीं सेठ जी , बीमारी तो काफी टाइम से चल रही थी ,  बहुत सारे टेस्ट भी कराये , पर बीमारी का पता ही नहीं चल पाया |

अरुण : पता नहीं , ये डॉक्टर भी क्या करते हैं | थोड़ा सा  कुछ हो जाये तो टेस्ट पर टेस्ट करते रहते है | जिंतनी साइंस तरक्क़ी कर रही है , उतनी ही बीमारियां बढ़ती जा रहीं हैं |

संदीप :  डॉक्टर भी बेचारे क्या करें | नयी नयी बीमारियां आ रही हैं |

अविन्दर : तो उन्हें रिसर्च करनी चाहिए |

संदीप  : भाई , रिसर्च तो कर लें परंतू उसके लिए मृत शरीर चाहिए होता है , और कोई भी व्यक्ति अपना मृत शरीर दान नहीं करता |

जगमोहन : शरीर दान करने से क्या होगा ?

संदीप : शरीर दान करने से डॉक्टर्स उस शरीर पर नए-नए एक्सपेरिमेंट्स करते हैं जिससे नयी खोज की जाती है,  और शरीर दान करना मुश्किल नहीं है | इसके लिए सिर्फ एक विल फॉर्म भरना होता है | विल फॉर्म भर कर उसे P.G.I.  के एनॉटॉमी डिपार्टमेंट में देना है. वहां से एक डोनेशन कार्ड बन कर आएगा |  

जगमोहन : फिर ?

संदीप : फिर क्या , बस जब डेथ हो तो कोई भी व्यक्ति डोनेशन कार्ड के पीछे लिखे नंबरों में से किसी पर भी फ़ोन कर दे | फ़ोन करने के बाद अस्पताल से वाहन और डॉक्टर्स आएंगे और शरीर को ले जायेंगे |

अविन्दर : तो क्या शरीर का कोई भी हिस्सा अंतिम संस्कार के लिए नहीं मिलेगा ?

संदीप : अरे , जब शरीर दान ही कर दिया तो शरीर के टुकड़े का क्या करना |

अरुण : अरे संदीप सब बकवास बातें हैं | अगर शरीर दान कर दिया तो भूत बन के भटकना पड़ेगा , क्योंकि जिस शरीर का अंतिम संस्कार नहीं होता , उसकी आत्मा को शांति नहीं मिलती और वो हमेशा भटकता रहता है |

अविन्दर : ये तो सोच सोच की बात है | मैं तो सोचता हूँ की जब हम आने वाली जनरेशन के लिए आपने शरीर का दान करेंगे तो कुछ भी बुरा नहीं होगा | क्योकि भगवन अच्छा काम करने वालों के साथ बुरा नहीं कर सकता |

 

इतने में वहां एक डेड बॉडी और आ जाती है | मैं वहां जाता हूँ तो पता चलता है की वो डेड बॉडी एक २२ साल के लड़के की है जिसकी डेथ PGI में कल रात को ही हुई है. वो अपने माँ बाप का इकलोका लड़का था | गलत सांगत में पड़ कर ज्यादा शराब पीने से उसकी दोनों किडनी और लिवर खराब हो गए थे | माँ बाप करोड़पति हैं | बहुत कोशिश करी, परन्तु कोई भी ऑर्गन नहीं मिला और बेचारे की कल रात मृत्यु हो गई |

तभी मेने देखा की लोग मुझे जला रहें हैं | मुझे बहुत जलन होने लगी है , दर्द हो रहा है, दम घुट रहा है , मै जोर जोर से हाथ पैर मरने लगता हूँ , जोर से चीखने लगता हूँ |

 

ट्रीन .... ट्रीन .... ट्रीन ....

पापा उठो 6:00 बज गए हैं , मुझे स्कूल छोड़ कर आ जाओ | और मैं एक दम से उठ जाता हूँ | हे माता रानी मैं तो जिन्दा हूँ | मैं भाग  कर अपनी वैष्णवी को अपने गले से लगा लेता हूँ |

और कुछ देर बाद मैं नहा कर तैयार हो जाता हूँ |

पत्नी : आज बहुत जल्दी तैयार हो गए ?

मैं : हाँ , बहुत जरुरी काम है , कहीं जाना है |

पत्नी : मुझे पता है , मनसा देवी जा रहे होगे |

मैं : नहीं , माता रानी के दर्शन से भी ज्यादा जरुरी काम है | पहले वो काम करूँगा , फिर अपनी माँ के दर पर माथा टेकने जाऊंगा |

 

और मैं गाड़ी निकाल बेटी के साथ उस के स्कूल की तरफ चल देता हूँ |

बेटी : पापा , आप कहाँ जाओगे |

मैं : P.G.I.

बेटी : P.G.I. , पर क्यों पापा आप तो ठीक हो |

मैं : बेटे  आज बहुत जरुरी काम है | आज आप के पापा समाज और आप के प्रति अपनी ड्यूटी पूरी करने जा रहें हैं |

बेटी : वो कैसे पापा |

मैं : मेरे प्यारे बेटे आज आप के पापा अपने मरने के बाद अपनी आँखे , शरीर के अंग और अपने  मृत शरीर को दान करने के फॉर्म भरने जा रहे है |

बेटी : उससे क्या होगा पापा |

मैं : मेरी लाडो रानी  , मेरी आँखों से कोई अँधा देखेगा , मेरे शरीर के अंग किसी मरते आदमी की जान बचाएंगे और मेरे मृत शरीर पर रिसर्च कर के डॉक्टर्स नयी - नयी बिमारियों का इलाज ढूंढ़ेंगें |

बेटी : सच पापा | क्या  आप सचमुच ऐसा करोगे | पापा आप कितने अच्छे हो | थैंक यू  माता रानी, आप ने मुझे इतने अच्छे पापा दिए | पापा मै भी बड़े होकर आप के जैसे सारे फॉर्म भरुंगी  और ये कह कर मेरी प्यारी बेटी मेरे गलों को चूम लेती है " मेरे प्यारे पापा , मेरे गोलू मोलू पापा , कितने प्यारे हैं |    

 

अपनी बेटी के मुँह से ये बाते सुन कर मेरी आँखों से आंसू आने लगते हैं  और मैं उसे स्कूल छोड़ कर P.G.I. की तरफ ऐसे चल देता हूँ जैसे माता रानी ने मुझे जीने का मकसद दे दिया हो . अब तक तो शायद मैं सिर्फ ऐसे ही जी रहा था |

 

 

ਇਸ ਖ਼ਬਰ ਤੇ ਤੁਹਾਡੀ ਟਿੱਪਣੀ
ਸਿਹਤ ਖਜ਼ਾਨਾ ਵਿੱਚ ਹੋਰ
ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਦੀ ਸਮੇਂ ਸਿਰ ਸ਼ਨਾਖ਼ਤ

ਸੰਸਾਰ ਸਿਹਤ ਸੰਸਥਾ ਹਰ ਸਾਲ 7 ਅਪਰੈਲ ਨੂੰ ਸੰਸਾਰ ਸਿਹਤ ਦਿਵਸ ਮਨਾਉਂਦੀ ਹੈ। ਇਸ ਦਾ ਮਕਸਦ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਸਿਹਤ ਪੱਖੋਂ ਜਾਗਰੂਕ ਕਰਨਾ ਅਤੇ ਆਮ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਵਧੀਆ ਸਿਹਤ ਸਹੂਲਤਾਂ ਯਕੀਨੀ ਬਣਾਉਣ ਲਈ ਉਪਰਾਲੇ ਕਰਨਾ ਹੈ। ਸਮਾਜ ਵਿਚ ਬਹੁਤ ਕਿਸਮ ਦੀਆਂ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਦਾ ਪਸਾਰਾ ਹੈ। ਇਹ ਬਿਮਾਰੀਆਂ ਮਾਨਸਿਕ ਪਰੇਸ਼ਾਨੀ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਕਈ ਕਿਸਮ ਦੀ ਅਪੰਗਤਾ ਦਾ ਕਾਰਨ ਵੀ ਬਣਦੀਆਂ ਹਨ। ਇਸ ਅਪੰਗਤਾ ਸਦਕਾ ਕਿਸੇ ਵੀ ਮੁਲਕ ਦੀ ਕੁਲ ਉਤਪਾਦਨ ਦਰ ਉੱਤੇ ਬੁਰਾ ਅਸਰ ਪੈਂਦਾ ਹੈ।

ਮਾਂ ਦਾ ਦੁੱਧ ਬੱਚੇ ਦਾ ਕੁਦਰਤੀ ਹੱਕ

ਪਿੱਛੇ ਜਿਹੇ ਆਪਣੇ ਭਾਰਤ ਦੌਰੇ ਦੌਰਾਨ ਮੈਂ ਪਰਿਵਾਰ ਸਣੇ ਕਾਫ਼ੀ ਗਹਿਮਾ-ਗਹਿਮੀ ਵਾਲੇ ਰੈਸਤਰਾਂ ਵਿਚ ਬੈਠੀ ਸਾਂ ਕਿ ਮੇਰੇ ਤਿੰਨ ਸਾਲਾ ਪੁੱਤਰ ਨੇ ਦੁੱਧ ਚੁੰਘਾਉਣ ਦੀ ਮੰਗ ਕੀਤੀ। ਮੈਂ ਫ਼ੌਰੀ ਬੈਗ ‘ਚੋਂ ਦੁਪੱਟਾ ਲੈ ਕੇ ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਢਕਿਆ ਤੇ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਦੁੱਧ ਚੁੰਘਾਉਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦਿੱਤਾ। ਮੇਰੇ ਲਈ ਹੈਰਾਨੀ ਵਾਲੀ ਗੱਲ ਸੀ ਕਿ ਇਸ ਦੌਰਾਨ ਮੇਰੇ ਆਸੇ-ਪਾਸੇ ਵਿਚਰ ਰਹੇ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਇਸ ਦੀ ਕੋਈ ਪ੍ਰਵਾਹ ਨਹੀਂ ਸੀ। ਕੁਝ ਕੁ ਥੋੜ੍ਹੀ ਪ੍ਰੇਸ਼ਾਨੀ ਦਿਖਾ ਰਹੇ ਸਨ ਪਰ ਕੁੱਲ ਮਿਲਾ ਕੇ ਮੇਰੇ ਲਈ ਇਹ ਸ਼ਾਨਦਾਰ ਤਜਰਬਾ ਸੀ। ਜੇ 10-15 ਸਾਲ ਪਹਿਲਾਂ ਦੀ ਗੱਲ ਹੁੰਦੀ ਤਾਂ ਮੈਂ ਅੰਦਾਜ਼ਾ ਲਾ ਸਕਦੀ ਸਾਂ ਕਿ ਇਨ੍ਹਾਂ ਹੀ ਨਜ਼ਰਾਂ ਨੇ ਕਿਵੇਂ ਪ੍ਰਤੀਕਿਰਿਆ ਕਰਨੀ ਸੀ। ਇਸ ਤੋਂ ਪਤਾ ਲੱਗਦਾ ਹੈ ਕਿ ਭਾਰਤੀ ਸਮਾਜ ਨੇ ਇਸ ਸਮੇਂ ਦੌਰਾਨ ਕਿੰਨੀ ਤਰੱਕੀ ਕੀਤੀ ਹੈ।

ਸਵਾਈਨ ਫਲੂ: ਮੁੱਢਲੀ ਜਾਣਕਾਰੀ ਤੇ ਬਚਾਓ ਵਾਸਤੇ ਸਾਵਧਾਨੀਆਂ

ਪੰਜਾਬ ਸਰਕਾਰ ਨੇ ਆਪਣੀ ਨੋਟੀਫਿਕੇਸ਼ਨ (2 ਅਗਸਤ 2018) ਰਾਹੀਂ ਪੰਜਾਬ ਵਿਚ ਸਵਾਈਨ ਫਲੂ ਦੀ ਵਬਾ ਫੈਲਣ ਦੇ ਖਦਸ਼ੇ ਦਾ ਐਲਾਨ ਕਰਕੇ ਹੁਕਮ ਕੀਤੇ ਸਨ ਕਿ ਇਸ ਮਹਾਂਮਾਰੀ ਦੇ ਖਤਰੇ ਦੇ ਸਨਮੁਖ, ਸਵਾਈਨ ਫਲੂ ਦੇ ਹਰ ਮਰੀਜ਼ ਦੀ ਨੋਟੀਫਿਕੇਸ਼ਨ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇ। ਮਹਾਂਮਾਰੀ ਕਾਨੂੰਨ-1897 ਤਹਿਤ ਸਰਕਾਰੀ ਤੇ ਪ੍ਰਾਈਵੇਟ ਹਸਪਤਾਲਾਂ ਵਾਸਤੇ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ ਕਿ ਉਹ ਇਸ ਬਿਮਾਰੀ ਦੇ ਕੈਟਾਗਿਰੀ ‘ਬੀ’ ਦੇ ਹਰ ਮਰੀਜ਼ ਦੀ ਅਤੇ ਇਨਫਲੂੰਜਾ ਵਾਇਰਸ ਵਰਗੀ ਬਿਮਾਰੀ ਦੀ ਸੂਚਨਾ ਸਿਹਤ ਤੇ ਪਰਿਵਾਰ ਭਲਾਈ ਵਿਭਾਗ ਦੇ ਡਾਇਰੈਕਟਰ ਨੂੰ ਭੇਜਣ। ਆਪਣੇ ਹਸਪਤਾਲਾਂ ਵਿਚ ਇਨ੍ਹਾਂ ਮਰੀਜ਼ਾਂ ਵਾਸਤੇ ਨਿਵੇਕਲਾ, ਦੂਜਿਆਂ ਨੂੰ ਛੋਹ ਨਾ ਸਕਣ ਵਾਲਾ ਵੱਖਰਾ ਸਥਾਨ ਨਿਰਧਾਰਤ ਕਰਨ।

ਵਧੇਰੇ ਖ਼ੂਨ ਪੈਣਾ ਤੇ ਬੇਤਰਤੀਬੀ ਮਾਹਵਾਰੀ

‘ਜਣਨੀ’ ਤੋਂ ਭਾਵ ਹੈ ਜਣਨ ਵਾਲੀ ਜਾਂ ਜਨਮ ਦੇਣ ਵਾਲੀ। ਇਹ ਕੁਦਰਤ ਦੀ ਦੇਣ ਹੈ ਕਿ ਜਨਮ ਦੇਣ ਵਾਲੀ ਜਨਨੀ (ਔਰਤ) ਨੂੰ ਜੀਵਨ-ਕਾਲ ਦੌਰਾਨ ਮਰਦਾਂ ਨਾਲੋਂ ਕਿਤੇ ਵੱਧ ਸਰੀਰਕ ਤੇ ਮਾਨਸਿਕ ਤਬਦੀਲੀਆਂ ਦਾ ਸਾਹਮਣਾ ਕਰਨਾ ਪੈਂਦਾ ਹੈ। ਇਹ ਤਬਦੀਲੀਆਂ ਸਰੀਰਕ ਤੇ ਮਾਨਸਿਕ ਕਸ਼ਟ ਵੀ ਦਿੰਦੀਆਂ ਹਨ ਪਰ ਲੜਕੀ ਜਾਂ ਔਰਤ, ਆਪਣੇ ਆਪ ਨੂੰ ਉਨ੍ਹਾਂ ਮੁਤਾਬਿਕ ਢਾਲ਼ ਲੈਂਦੀ ਹੈ। ਇਸੇ ਕਰਕੇ ਉਸ ਵਿਚ ਸਬਰ, ਸੰਤੋਖ, ਜੇਰਾ, ਸਹਿਜ, ਸੁਹਜ, ਸਹਿਣਸ਼ੀਲਤਾ, ਕੰਮ ਕਰਨ ਵਿਚ ਸੰਜੀਦਗੀ ਆਦਿ ਵਾਲੇ ਗੁਣ ਮਰਦ ਨਾਲੋਂ ਵਧੇਰੇ ਹੁੰਦੇ ਹਨ।

ਮਨੁੱਖ ਦੇ ਨਿਰਸਵਾਰਥ ਮਿੱਤਰ

ਰੋਗ ਇਕ ਅਜਿਹਾ ਸ਼ਬਦ ਹੈ ਜਿਸਨੂੰ ਸੁਣਦਿਆਂ ਹੀ ਅਸੀਂ ਸਾਰੇ ਚੁਕੰਨੇ ਜਿਹੇ ਹੋ ਜਾਂਦੇ ਹਾਂ ਤੇ ਡਰ ਜਾਂਦੇ ਹਾਂ। ਲੇਕਿਨ ਕੀ ਅਸੀਂ ਜਾਣਦੇ ਹਾਂ ਕਿ ਜੇਕਰ ਇਹ ਰੋਗ ਨਾ ਹੋਣ ਤਾਂ ਸਾਨੂੰ ਕਿਵੇਂ ਪਤਾ ਲੱਗੇਗਾ ਕਿ ਸਾਡੇ ਸਰੀਰ ਦੇ ਅੰਦਰ ਕੋਈ ਵਿਕਾਰ ਪੈਦਾ ਹੋ ਗਿਆ ਹੈ। ਰੋਗ ਤਾਂ ਬਿਨਾਂ ਸੁਆਰਥ ਇਕ ਮਿੱਤਰ ਬਣ ਕੇ ਸਾਨੂੰ ਸੰਭਲ ਜਾਣ ਦੀ ਚੇਤਾਵਨੀ ਦਿੰਦੇ ਹਨ ਤਾਂ ਕਿ ਅਸੀਂ ਸੁਚੇਤ ਹੋ ਜਾਈਏ ਅਤੇ ਉਸ ਵਿਕਾਰ ਨੂੰ ਦੂਰ ਕਰਨ ਲਈ ਆਪਣੀ ਕੋਸ਼ਿਸ਼ ਆਰੰਭ ਕਰ ਦੇਈਏ। ਰੋਗ ਸਾਨੂੰ ਕੁਦਰਤ ਦੇ ਨਿਯਮਾਂ ’ਤੇ ਚੱਲਣ, ਭਾਵ ਸਿਹਤਮੰਦ ਰਹਿਣ ਦੀ ਸਿੱਖਿਆ ਦਿੰਦੇ ਹਨ।

ਹੱਡੀਆਂ ਨੂੰ ਖੋਖਲਾ ਬਣਾਉਣ ਵਾਲਾ ਰੋਗ

ਆਸਟਯੋਪੋਰੋਸਿਸ ਹੱਡੀਆਂ ਨੂੰ ਭੁਰਭੁਰੀ ਅਤੇ ਖੋਖਲੀ ਬਣਾ ਦੇਣ ਵਾਲਾ ਅਜਿਹਾ ਰੋਗ ਹੈ ਜਿਸ ਕਾਰਨ ਹੱਡੀਆਂ ਸੌਖਿਆਂ ਹੀ ਟੁੱਟ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ। ਇਸ ਨੂੰ ਖਾਮੋਸ਼ ਰੋਗ ਵੀ ਕਿਹਾ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਆਮ ਤੌਰ ‘ਤੇ ਜਦੋਂ ਤੱਕ ਰੋਗੀ ਨੂੰ ਫਰੈਕਚਰ ਨਹੀਂ ਹੋ ਜਾਂਦਾ, ਤਦ ਤੱਕ ਇਸ ਦਾ ਪਤਾ ਨਹੀਂ ਲੱਗਦਾ। ਇਸ ਰੋਗ ਵਿਚ ਹੱਡੀਆਂ ਇਸ ਹੱਦ ਤੱਕ ਕਮਜ਼ੋਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਕਿ ਹਲਕਾ ਜਹੇ ਝੱਟਕਾ ਲੱਗਣ, ਡਿੱਗਣ ਅਤੇ ਇੱਥੋਂ ਤੱਕ ਕਿ ਛਿੱਕ ਆਉਣ ਜਾਂ ਖੰਘਣ ਨਾਲ ਵੀ ਰੀੜ੍ਹ ਦੀ ਹੱਡੀ ਫਰੈਕਚਰ ਹੋ ਸਕਦੀ ਹੈ। ਇਹ ਹਾਲਤ ਅਚਾਨਕ ਪੈਦਾ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਸਗੋਂ ਉਮਰ ਵਧਣ ਨਾਲ ਵਿਕਸਿਤ ਹੁੰਦੀ ਹੈ ਤੇ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਵਧਦੀ ਹੈ। ਆਸਟਯੋਪੋਰੋਸਿਸ ਹੁਣ ਵੱਡੇਰੀ ਉਮਰ ਦੇ ਟਾਕਰੇ ਵਿਚ ਜਵਾਨ ਲੋਕਾਂ ਨੂੰ ਵੀ ਹੋ ਰਹੀ ਹੈ।ਮਾਹਿਰ ਦੱਸਦੇ ਹਨ ਕਿ ਭਾਰਤੀਆਂ ਵਿਚ ਜੀਵਨ ਆਸਰਾ ਵਧਣ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਔਰਤਾਂ ਵਿਚ ਵਿਟਾਮਿਨ-ਡੀ ਦੀ ਕਮੀ ਦਾ ਕਹਿਰ ਵੀ ਵਧ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਵਿਟਾਮਿਨ-ਡੀ ਦੀ ਕਮੀ ਦੀ ਵਿਆਪਕ ਸਮੱਸਿਆ ਦੇ ਨਾਲ ਨਾਲ ਘੱਟ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਕੈਲਸ਼ੀਅਮ ਦੇ ਸੇਵਨ, ਆਸਟਯੋਪੋਰੋਸਿਸ ਬਾਰੇ ਵਿਚ ਬਹੁਤ ਘੱਟ ਜਾਗਰੂਕਤਾ ਅਤੇ ਭਾਰਤੀ ਔਰਤਾਂ ਵਿਚ ਆਸਟਯੋਪੋਰੋਸਿਸ ਦੀ ਪਛਾਣ ਵਿਚ ਮੁਸ਼ਕਿਲ ਵਰਗੇ ਕਾਰਨਾਂ ਕਰਕੇ ਭਾਰਤ, ਖਾਸ ਕਰਕੇ ਪੰਜਾਬ ਦੀਆਂ ਔਰਤਾਂ ਵਿਚ ਆਸਟਯੋਪੋਰੋਸਿਸ ਮੁੱਖ ਸਿਹਤ ਸਮੱਸਿਆ ਬਣ ਗਈ ਹੈ।

ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਿਤ ਹਵਾ ਤੇ ਇਨਸਾਨੀ ਸਰੀਰ

ਦੁਨੀਆ ਭਰ ਵਿਚ ਹਵਾ ਵਿਚਲੇ ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਣ ਨਾਲ 70 ਲੱਖ ਮੌਤਾਂ ਹਰ ਸਾਲ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚ ਆਵਾਜਾਈ ਦੇ ਸਾਧਨਾਂ ਰਾਹੀਂ ਨਿਕਲ ਰਹੀ ਗੰਦਗੀ, ਜੰਗਲਾਂ ਵਿਚ ਲੱਗੀ ਅੱਗ, ਫੈਕਟਰੀਆਂ ਵਿਚੋਂ ਨਿਕਲਦੀਆਂ ਗੈਸਾਂ (ਟਰੋਪੋਸਫੈਰਿਕ ਓਜ਼ੋਨ, ਸਲਫਰ ਡਾਇਆਕਸਾਈਡ, ਨਾਈਟਰੋਜਨ ਡਾਇਆਕਸਾਈਡ, ਬੈਂਜ਼ੋਪਾਈਰੀਨ ਆਦਿ) ਜਾਂ ਜਵਾਲਾ ਮੁਖੀ ਸ਼ਾਮਲ ਹਨ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਗੈਸਾਂ ਨਾਲ ਸਰੀਰ ਦੇ ਵੱਖ ਵੱਖ ਹਿੱਸਿਆਂ ਉੱਤੇ ਅਸਰ ਪੈਂਦਾ ਹੈ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚ ਸ਼ਾਮਲ ਹਨ:

ਠੰਢ ਵਿਚ ਸਾਹ ਦੀਆਂ ਕੁਝ ਸਮੱਸਿਆਵਾਂ

ਕੁਦਰਤ ਦੁਆਰਾ ਮਨੁੱਖ ਨੂੰ ਬਖ਼ਸ਼ੀ ਸਾਹ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਵਿਚ ਸਾਹ ਰਗ, ਦੋ (ਸੱਜੀ ਤੇ ਖੱਬੀ) ਮੁੱਖ ਸਾਹ ਨਾਲੀਆਂ ਅਤੇ ਦੋ ਫੇਫੜੇ ਆਉਂਦੇ ਹਨ। ਫੇਫੜਿਆਂ ਅੰਦਰ ਸਾਹ ਨਾਲੀਆਂ ਦੀਆਂ ਛੋਟੀਆਂ ਛੋਟੀਆਂ ਸ਼ਾਖ਼ਾਵਾਂ ਹੁੰਦੀਆਂ ਜਾਂਦੀਆਂ ਹਨ ਜੋ ਆਖ਼ਰ ਵਿਚ ਹਵਾ ਨਾਲੀਆਂ ਵਿਚ ਖੁੱਲ੍ਹਦੀਆਂ ਹਨ।

ਗੁਰਦੇ ਫੇਲ੍ਹ ਹੋਣਾ

ਕੁਦਰਤ ਨੇ ਮਨੁੱਖ ਨੂੰ (ਤੇ ਦੂਸਰੇ ਜਾਨਵਰਾਂ ਨੂੰ ਵੀ) ਬਹੁਤ ਵਾਧੂ ਦਾਤਾਂ ਦਿੱਤੀਆਂ ਹੋਈਆਂ ਹਨ ਜਿਵੇਂ ਦੋ ਫੇਫੜੇ, ਦੋ ਕੰਨ, ਦੋ ਅੱਖਾਂ, ਦੋ ਪਤਾਲੂ (ਮਰਦਾਂ ਵਿਚ) ਅਤੇ ਦੋ ਅੰਡਕੋਸ਼ (ਔਰਤਾਂ ਵਿਚ), ਜਦਕਿ ਇਕ ਨਾਲ ਵੀ ਗੁਜ਼ਾਰਾ ਹੋ ਸਕਦਾ ਹੈ। ਇਨ੍ਹਾਂ ‘ਚੋਂ ਇਕ ਅੰਗ ਖ਼ਰਾਬ ਵੀ ਹੋ ਜਾਵੇ ਤਾਂ ਦੂਸਰੇ (ਇਕੱਲੇ ਅੰਗ) ਨਾਲ ਆਮ ਵਾਂਗ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਜੀਵੀ ਜਾ ਸਕਦੀ ਹੈ। ਇਵੇਂ ਹੀ ਨੇ ਗੁਰਦੇ ਵੀ, ਦੋ (ਸੱਜਾ ਤੇ ਖੱਬਾ) ਬਖ਼ਸ਼ੇ ਹੋਏ ਹਨ ਜੋ ਪੇਟ ਵਿਚ ਪਿਛਲੇ ਪਾਸੇ ਰੀੜ੍ਹ ਦੀ ਹੱਡੀ ਦੇ ਆਸ ਪਾਸ ਹਨ। ਗੁਰਦਿਆਂ ਦਾ ਕੰਮ ਹੈ- ਸਰੀਰ ਦੀਆਂ ਵੱਖ ਵੱਖ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਦੌਰਾਨ ਪੈਦਾ ਹੋਏ ਜ਼ਹਿਰੀਲੇ ਤੇ ਫਾਲਤੂ ਤੱਤ ਪਿਸ਼ਾਬ ਰਾਹੀਂ ਬਾਹਰ ਕੱਢਣੇ ਅਤੇ ਸਰੀਰ ਵਿਚ ਪਾਣੀ ਦੀ ਮਿਕਦਾਰ ਦਾ ਸੰਤੁਲਨ ਰੱਖਣਾ। ਕਹਿ ਸਕਦੇ ਹਾਂ ਕਿ ਗੁਰਦੇ, ਪੋਣੀ ਦਾ ਕੰਮ ਕਰਦੇ ਹਨ ਜੋ ਜ਼ਹਿਰੀਲੇ ਪਦਾਰਥਾਂ ਨੂੰ ਪੁਣ ਕੇ, ਤੇ ਵਾਧੂ ਪਾਣੀ ਨੂੰ ਛਾਣ ਕੇ ਪਿਸ਼ਾਬ ਬਣਾਉਂਦੇ ਹਨ ਜੋ ਬਾਅਦ ਵਿਚ ਮਸਾਨੇ ਤੱਕ ਪਹੁੰਚਦਾ ਹੈ, ਤੇ ਅਸੀਂ ਆਪਣੀ ਇੱਛਾ ਅਨੁਸਾਰ ਇਸ ਨੂੰ ਸਰੀਰ ‘ਚੋਂ ਬਾਹਰ ਕੱਢਦੇ ਹਾਂ।

ਡਿਪਰੈਸ਼ਨ: ਗੰਭੀਰ ਮਨੋਰੋਗ

ਡਿਪਰੈਸ਼ਨ ਮਾਨਸਿਕ ਰੋਗ ਹੈ ਜਿਹੜਾ ਅਜੋਕੇ ਸਮੇਂ ਵਿਚ ਵਧ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਹਰ ਦਸਵਾਂ ਬੰਦਾ ਇਸ ਦਾ ਸ਼ਿਕਾਰ ਹੈ। ਡਿਪਰੈਸ਼ਨ ਮਨ ਦੀ ਸਥਿਤੀ ਹੈ ਜਿਸ ਵਿਚ ਬੰਦਾ ਗ਼ਲਤ ਗੱਲਾਂ ਬਾਰੇ ਸੋਚਦਾ ਹੈ, ਮਨ ਵਿਚ ਭੈੜੇ ਵਿਚਾਰ ਪੈਦਾ ਹੁੰਦੇ ਹਨ, ਆਪਣੇ ਨਾਲ ਤੇ ਆਪਣੇ ਆਲੇ-ਦੁਆਲੇ ਦੂਜੇ ਲੋਕਾਂ ਵੱਲ ਵਤੀਰਾ ਨਾਕਾਰਤਮਕ ਬਣ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਉਹ ਢਹਿੰਦੀਆਂ ਕਲਾਂ ਵਿਚ ਰਹਿੰਦਾ ਹੈ। ਇਕ ਪੜਾਅ ’ਤੇ ਆਤਮ-ਹੱਤਿਆ ਦੇ ਵਿਚਾਰ ਵੀ ਆਉਂਦੇ ਹਨ। ਉਸ ਵਿਚ ਅਸਫ਼ਲਤਾ ਦੀਆਂ ਭਾਵਨਾਵਾਂ ਜ਼ਿਆਦਾ ਉਪਜਦੀਆਂ ਹਨ ਅਤੇ ਉਸ ਦੀ ਕਿਸੇ ਵਿਚ ਕੋਈ ਦਿਲਚਸਪੀ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦੀ।

ਮਾਨਸਿਕ ਸਕੂਨ ਬਨਾਮ ਜੀਵਨਸ਼ੈਲੀ

ਤਕਨੀਕੀ ਯੁੱਗ ਵਿਚ ਜਿੱਥੇ ਸੁੱਖ ਸਹੂਲਤਾਂ ਦੇ ਸਾਜੋੋ ਸਾਮਾਨ ਦੇ ਅੰਬਾਰ ਲੱਗੇ ਹੋੋਏ ਹਨ, ਉੱਥੇ ਮਨੁੱਖ ਆਪਣੀਆਂ ਖਾਹਿਸ਼ਾਂ ਤੇ ਇੱਛਾਵਾਂ ਵਿਚ ਵੀ ਬੇਇੰਤਹਾ ਵਾਧਾ ਕਰ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਤਾਉਮਰ ਇਨ੍ਹਾਂ ਦੀ ਪੂਰਤੀ ਲਈ ਯਤਨ ਕਰਦਾ ਹੈ। ਚੰਗੀ ਭਲੀ ਰਵਾਂ-ਰਵੀਂ ਚੱਲ ਰਹੀ ਜ਼ਿੰਦਗੀ ਦੀਆਂ ਲੀਹਾਂ ਤੋੋਂ ਹੱਟ ਕੇ ਉਹ ਹਰ ਜਾਇਜ਼, ਨਾਜਾਇਜ਼ ਤਰੀਕੇ ਵਰਤਦਾ ਸਾਰਾ ਜੀਵਨ ਦਾਅ ’ਤੇ ਲਾਉਂਦਾ ਹੈ।

ਯਾਦ ਸ਼ਕਤੀ ਦਾ ਕਮਜ਼ੋਰ ਹੋਣਾ

ਉਮਰ ਵਧਣ ਨਾਲ ਸਰੀਰ ਤਾਂ ਕਮਜ਼ੋਰ ਹੁੰਦਾ ਹੀ ਹੈ, ਯਾਦਾਸ਼ਤ ਵੀ ਕਮਜ਼ੋਰ ਹੋ ਜਾਂਦੀ ਹੈ। ਕਈ ਵਾਰ ਬਹੁਤ ਜ਼ੋਰ ਦੇਣ ’ਤੇ ਵੀ ਕਿਸੇ ਜਾਣਨ ਵਾਲੇ ਦਾ ਨਾਂ ਜਾਂ ਕੋਈ ਖ਼ਾਸ ਤਰੀਕ ਯਾਦ ਨਹੀਂ ਆਉਂਦੀ । 50 ਸਾਲ ਦੀ ਉਮਰ ਤਕ 40 ਫ਼ੀਸਦੀ ਲੋਕ ਭੁੱਲਣ ਲੱਗ ਜਾਂਦੇ ਹਨ। 70 ਸਾਲ ਤਕ ਪਹੁੰਚ ਕੇ 70 ਤੋਂ 80 ਫ਼ੀਸਦੀ ਲੋਕਾਂ ਦੀ ਯਾਦ ਸ਼ਕਤੀ ਘਟ ਜਾਂਦੀ ਹੈ।

ਕੈਂਸਰ ਦੇ ਇਲਾਜ ਵਿਚ ਇਮਿਊਨੋਥੈਰੇਪੀ

ਸਵਾਲ: ਸਾਲ 2018 ਦਾ ਮੈਡੀਕਲ ਖਿੱਤੇ ਦਾ ਨੋਬੇਲ ਪੁਰਸਕਾਰ ਜੇਤੂ ਕੌਣ ਹੈ?
ਜਵਾਬ: ਇਸ ਸਾਲ ਦੇ ਨੋਬੇਲ ਔਸ਼ਧੀ ਇਨਾਮ ਦਾ ਮਾਣ ਦੋ ਕੈਂਸਰ ਚਿਕਿਤਸਾ ਵਿਗਿਆਨੀਆਂ ਨੂੰ ਹਾਸਲ ਹੋਇਆ ਹੈ। ਜੇਮਜ਼ ਐਲੀਸਨ ਅਤੇ ਟਾਸੁਕੂ ਹੋਂਜੋ ਅਜਿਹੇ ਦੋ ਮਹਾਨ ਵਿਗਿਆਨਕ ਹਨ, ਜਿਨ੍ਹਾਂ ਨੇ ਆਪੋ ਆਪਣੇ ਤਰੀਕੇ ਨਾਲ ਇਮਿਊਨੋਥੈਰੇਪੀ ਖਿੱਤੇ ਵਿਚ ਵੱਖ ਵੱਖ ਕੰਮ ਕਰਕੇ ਇਸ ਨਵੀਂ ਇਲਾਜ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਨੂੰ ਸਫ਼ਲ ਅਤੇ ਕਾਰਗਰ ਸਾਬਿਤ ਕੀਤਾ; ਹਾਲਾਂਕਿ ਇਹ ਪ੍ਰਣਾਲੀ 2014 ਤੋਂ ਦੁਨੀਆਂ ਵਿਚ ਵਰਤੀ ਜਾਣੀ ਸ਼ੁਰੂ ਹੋ ਗਈ ਹੈ, ਪਰ ਇਹ ਮਹਾਨ ਇਨਾਮ ਨਾਲ ਇਨ੍ਹਾਂ ਮਹਾਨ ਹਸਤੀਆਂ ਨੂੰ ਹੁਣ ਨਿਵਾਜਿਆ ਗਿਆ ਹੈ।

ਜਿਗਰ ਦਾ ਮਹੱਤਵ ਅਤੇ ਰੋਗਾਂ ਤੋਂ ਬਚਾਅ

ਦਿਲ, ਦਿਮਾਗ, ਗੁਰਦੇ ਅਤੇ ਫੇਫੜਿਆਂ ਵਾਂਗ ਮਨੁੱਖੀ ਸਰੀਰ ਦਾ ਇਕ ਹੋਰ ਮੁੱਖ ਅੰਗ ਹੁੰਦਾ ਹੈ- ਜਿਗਰ ਜਿਸ ਨੂੰ ਅੰਗਰੇਜ਼ੀ ਭਾਸ਼ਾ ਵਿਚ Liver ਕਹਿੰਦੇ ਹਨ। ਦਿਲ ਵਾਂਗ ਜਿਗਰ ਨੂੰ ਮਨੁੱਖੀ ਸਰੀਰ ਦਾ ਸਭ ਤੋਂ ਜ਼ਰੂਰੀ ਅੰਗ ਮੰਨਿਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ ਕਿਉਂਕਿ ਇਹ ਸਰੀਰ ਦੇ ਸਾਰੇ ਅੰਗਾਂ ਨਾਲ ਜੁੜਿਆ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਸਾਰੇ ਅੰਗਾਂ ਵਿਚ ਸਮਾਨਤਾ ਬਣਾਈ ਰੱਖਣ ਦਾ ਕੰਮ ਕਰਦਾ ਹੈ। ਸਰੀਰ ਦੇ ਸੱਜੇ ਪਾਸੇ ਡੇਢ ਕਿਲੋ ਭਾਰਾ ਇਹ ਅੰਗ ਦਿਲ ਨੂੰ ਅੰਤੜੀਆਂ, ਪੇਟ, ਆਹਾਰ ਨਾਲੀ ਅਤੇ ਤਿੱਲ (Spleen) ਤੋਂ ਜਾਣ ਵਾਲੇ ਖੂਨ ਨੂੰ ਸਾਫ ਕਰਨ ਦਾ ਕੰਮ ਕਰਦਾ ਹੈ। ਜਿਗਰ ਬਿਨਾਂ ਮਨੁੱਖੀ ਸਰੀਰ ਦੀ ਬਣਤਰ ਅਤੇ ਸਰੀਰਕ ਕਿਰਿਆਵਾਂ ਮੁਕੰਮਲ ਨਹੀਂ ਹੋ ਸਕਦੀਆਂ।

ਛਾਤੀ ਦੇ ਕੈਂਸਰ ਬਾਰੇ ਕੁਝ ਗੱਲਾਂ

ਸਵਾਲ: ਕੀ ਛਾਤੀ ਦੇ ਕੈਂਸਰ ਦੇ ਇਲਾਜ ਲਈ ਚੀਰਫਾੜ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹੈ?
ਜਵਾਬ: ਚੀਰਫਾੜ ਇਲਾਜ ਦਾ ਜ਼ਰੂਰੀ ਹਿੱਸਾ ਹੈ। ਇਸ ਤੋਂ ਬਿਨਾਂ ਕੈਂਸਰ ਨੂੰ ਜੜ੍ਹੋਂ ਨਹੀਂ ਮੁਕਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ। ਬਹੁਤ ਛੋਟੇ ਕੈਂਸਰ ਦੀ ਸ਼ੁਰੂਆਤ ਵਿਚ ਹੀ ਚੀਰਫਾੜ ਕਰ ਦਿੱਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ, ਪਰ ਵੱਡੇ ਕੈਂਸਰ ਨੂੰ ਪਹਿਲਾਂ ਕੀਮੋਥੈਰੇਪੀ ਦੇ ਕੇ ਛੋਟਾ ਕਰਨ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਚੀਰਫਾੜ ਕੀਤੀ ਜਾਂਦੀ ਹੈ। ਅੱਜਕੱਲ੍ਹ ਤਕਨੀਕੀ ਵਿਕਾਸ ਦੇ ਸਦਕਾ ਬਹੁਤ ਸਾਰੇ ਮਰੀਜ਼ਾਂ ਵਿਚ ਸਿਰਫ਼ ਗੰਢ ਨੂੰ ਕੱਢ ਕੇ ਛਾਤੀ ਨੂੰ ਬਚਾਇਆ ਜਾ ਸਕਦਾ ਹੈ, ਪਰ ਕੁਝ ਮਾਮਲਿਆਂ ਵਿਚ ਕੈਂਸਰ ਵੱਡਾ ਜਾਂ ਛਾਤੀ ਛੋਟੀ ਹੋਣ ਕਰਕੇ ਚੀਰਫਾੜ ਦੌਰਾਨ ਪੂਰੀ ਛਾਤੀ ਨੂੰ ਕੱਢਣਾ ਪੈ ਸਕਦਾ ਹੈ।

ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਿਤ ਹਵਾ ਦਾ ਇਨਸਾਨੀ ਸਰੀਰ ’ਤੇ ਅਸਰ

ਸੰਸਾਰ ਭਰ ਵਿਚ ਹਵਾ ਵਿਚਲੇ ਪ੍ਰਦੂਸ਼ਣ ਨਾਲ 70 ਲੱਖ ਮੌਤਾਂ ਹਰ ਸਾਲ ਹੁੰਦੀਆਂ ਹਨ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਵਿਚ ਆਵਾਜਾਈ ਦੇ ਸਾਧਨਾਂ ਰਾਹੀਂ ਨਿਕਲ ਰਹੀ ਗੰਦਗੀ, ਜੰਗਲਾਂ ਵਿਚ ਲੱਗੀ ਅੱਗ, ਫੈਕਟਰੀਆਂ ਵਿਚੋਂ ਨਿਕਲਦੀਆਂ ਗੈਸਾਂ (ਟਰੋਪੋਸਫੈਰਿਕ ਓਜ਼ੋਨ, ਸਲਫਰ ਡਾਇਆਕਸਾਈਡ, ਨਾਈਟਰੋਜਨ ਡਾਇਆਕਸਾਈਡ, ਬੈਂਜ਼ੋਪਾਈਰੀਨ ਆਦਿ) ਜਾਂ ਜਵਾਲਾ ਮੁਖੀ ਸ਼ਾਮਲ ਹਨ।

ਵਧਦੀ ਉਮਰ ਦੇ ਤੰਤੂ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਦੇ ਰੋਗ

ਹਰ ਸਾਲ 29 ਮਈ ਨੂੰ ਸੰਸਾਰ ਮਲਟੀਪਲ ਸਕਲੀਰੋਸਿਸ ਦਿਵਸ ਮਨਾਇਆ ਜਾਂਦਾ ਹੈ। ਭਾਰਤ ਵਿਚ ਵੀ ਕਈ ਥਾਈਂ ਇਹ ਦਿਵਸ ਮਨਾਇਆ ਗਿਆ, ਤਕਰੀਬਨ ਹਰ ਪ੍ਰੋਗਰਾਮ ਵਿਚ ਇਹ ਗੱਲ ਸਾਹਮਣੇ ਆਈ ਕਿ ਮੁਲਕ ਵਿਚ ਤੰਤੂ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਦੇ ਰੋਗੀਆਂ ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਵਿਚ ਤੇਜ਼ੀ ਨਾਲ ਵਾਧਾ ਹੋ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਮੋਟੇ ਅਨੁਮਾਨ ਮੁਤਾਬਕ, ਮੁਲਕ ਵਿਚ ਵੱਖ ਵੱਖ ਤਰ੍ਹਾਂ ਦੇ ਤੰਤੂ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਦੇ ਰੋਗਾਂ ਤੋਂ ਪੀੜਤ ਰੋਗੀਆਂ ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਦੋ ਲੱਖ ਤੋਂ ਵੱਧ ਹੈ। ਇਸ ਦੇ ਬਾਵਜੂਦ ਇਸ ਤੋਂ ਖਹਿੜਾ ਛੁਡਾਉਣ ਦੇ ਇਲਾਜ ਦੇ ਸਮੁੱਚੇ ਪ੍ਰਬੰਧ ਦੀ ਬੇਹੱਦ ਘਾਟ ਹੈ। ਇਸ ਵਾਰੇ ਜਾਣਕਾਰੀ ਵੀ ਨਹੀਂ ਹੈ। ਬਹੁਤੇ ਲੋਕ ਅੱਜ ਵੀ ਇਸ ਦੇ ਕਾਰਨਾਂ ਤੋਂ ਅਣਭਿੱਜ ਹਨ ਅਤੇ ਸਾਲ ਦਰ ਸਾਲ ਤੰਤੂ ਪ੍ਰਬੰਧ ਦੇ ਰੋਗਾਂ ਦੀ ਮਾਰ ਵਿਚ ਆਉਣ ਵਾਲਿਆਂ ਦੀ ਗਿਣਤੀ ਵਧ ਰਹੀ ਹੈ

ਗਰਭ ਅਤੇ ਸ਼ੱਕਰ ਰੋਗ: ਅਹਿਮ ਨੁਕਤੇ

ਗਰਭ ਦੌਰਾਨ ਹਰ ਔਰਤ ਦੇ ਸਰੀਰ ਅੰਦਰਲੇ ਹਾਰਮੋਨਜ਼ ਵਿਚ ਤਬਦੀਲੀ ਆਉਂਦੀ ਹੈ। ਜਿਉਂ ਹੀ ਖਾਣਾ ਸਰੀਰ ਅੰਦਰ ਪਹੁੰਚੇ, ਸਰੀਰ ਵਿਚਲੀ ਸ਼ੱਕਰ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਵਧਣ ਲੱਗ ਪੈਂਦੀ ਹੈ, ਜਿਸ ਨਾਲ ਇਨਸੂਲਿਨ, ਗਲੂਕਾਗੌਨ, ਸੋਮੈਟੋਮੈਡਿਨ ਤੇ ਐਡਰੀਨਲ ਕੈਟਾਕੋਲਾਮੀਨ ਨਿਕਲ ਪੈਂਦੇ ਹਨ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਸਾਰੇ ਹਾਰਮੋਨਜ਼ ਸਦਕਾ ਹੀ ਜੱਚਾ ਤੇ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਲੋੜੀਂਦੀ ਸ਼ੱਕਰ ਦੀ ਮਾਤਰਾ ਪਹੁੰਚਦੀ ਹੈ।

ਬਾਲ ਰੱਖਿਅਕ ਹੈ ਮਾਂ ਦਾ ਦੁੱਧ

ਸੰਸਾਰ ਸਿਹਤ ਸੰਸਥਾ (ਡਬਲਿਊਟੀਓ) ਦੀਆਂ ਹਦਾਇਤਾਂ ਬਿਲਕੁਲ ਸਪਸ਼ਟ ਹਨ: ਨਵਜੰਮੇ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਪਹਿਲੇ ਛੇ ਮਹੀਨੇ ਸਿਰਫ ਮਾਂ ਦਾ ਦੁੱਧ ਪਿਲਾਓ, ਛੇ ਮਹੀਨੇ ਦਾ ਹੋਣ ‘ਤੇ ਹੋਰ ਭੋਜਨ ਜਿਵੇਂ ਪਤਲੀ ਦਾਲ, ਖਿਚੜੀ, ਖੀਰ, ਦਲੀਆ ਆਦਿ ਵੀ ਦੇਣਾ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦੇਵੋ ਅਤੇ ਮਾਂ ਦਾ ਦੁੱਧ ਦੋ ਸਾਲ ਤੱਕ ਜਾਂ ਉਸ ਤੋਂ ਵੀ ਬਾਅਦ ਤੱਕ ਦਿੰਦੇ ਰਹੋ। ਜਨਮ ਦੇ ਇਕ ਘੰਟੇ ਵਿਚ ਮਾਂ ਦਾ ਦੁੱਧ ਸ਼ੁਰੂ ਕਰ ਦੇਣਾ ਚਾਹੀਦਾ ਹੈ; ਜੇ ਜਨਮਘੁੱਟੀ ਦੇਣੀ ਹੈ, ਉਹ ਵੀ ਮਾਂ ਦੇ ਦੁੱਧ ਦੀ ਹੋਣੀ ਚਾਹੀਦੀ ਹੈ, ਸ਼ਹਿਦ ਜਾਂ ਚੀਨੀ ਜਾਂ ਹੋਰ ਕੁੱਝ ਨਹੀਂ। ਅਤਿ ਗਰਮੀਆਂ ਵਿਚ ਵੀ ਪਹਿਲੇ ਛੇ ਮਹੀਨੇ ਬੱਚੇ ਨੂੰ ਪਾਣੀ ਨਹੀਂ ਪਿਲਾਉਣਾ ਚਾਹੀਦਾ, ਕਿਉਂਕਿ ਬੱਚੇ ਦੀਆਂ ਜ਼ਰੂਰਤਾਂ ਲਈ ਮਾਂ ਦੇ ਦੁੱਧ ਵਿਚ ਪਾਣੀ ਸਹੀ ਮਾਤਰਾ ਵਿਚ ਮੌਜੂਦ ਹੁੰਦਾ ਹੈ ਅਤੇ ਇਸ ਪਾਣੀ ਰਾਹੀਂ ਬੱਚੇ ਦੀ ਨਾਜ਼ੁਕ ਪਾਚਣ ਪ੍ਰਣਾਲੀ ਨੂੰ ਕਿਸੇ ਕਿਸਮ ਦਾ ਨੁਕਸਾਨ ਹੋਣ ਦਾ ਡਰ ਵੀ ਨਹੀਂ ਹੁੰਦਾ।

ਆਧੁਨਿਕ ਡਾਕਟਰੀ ਵਿਗਿਆਨ: ਸੀਮਾਵਾਂ ਤੇ ਨੈਤਿਕਤਾ

ਆਧੁਨਿਕ ਡਾਕਟਰੀ ਵਿਗਿਆਨ ਨਿੱਤ ਨਵੀਂਆਂ ਪੁਲਾਂਘਾਂ ਪੁੱਟ ਕੇ ਇਲਾਜ ਵਿਚ ਨਵੇਂ ਮੀਲ ਪੱਥਰ ਗੱਡ ਰਿਹਾ ਹੈ। ਬਹੁਤੀਆਂ ਖੋਜਾਂ ਅਤੇ ਇਲਾਜ ਤਕਨੀਕਾਂ ਇਸ ਵਿਗਿਆਨ ਦੇ ਦਾਰਸ਼ਨਿਕ ਮਾਡਲ ਦੇ ਅਨੁਸਾਰ ਹੀ ਹਨ ਪਰ ਇਸ ਵਿਗਿਆਨ ਨੇ ਸਵੀਕਾਰ ਨਹੀਂ ਕੀਤਾ ਕਿ ਇਸ ਦੀਆਂ ਅਨੇਕਾਂ ਸੀਮਾਵਾਂ ਵੀ ਹਨ। ਸੀਮਾਵਾਂ ਕਿਉਂ? ਕਿਉਂ ਦਾ ਜਵਾਬ ਹੈ- ਨਿਊਟਨੀ ਭੌਤਿਕ ਵਿਗਿਆਨ ‘ਤੇ ਟਿਕਿਆ ਇਸ ਦਾ ਦਾਰਸ਼ਨਿਕ ਆਧਾਰ। ਇਸੇ ਦਰਸ਼ਨ ਸਹਾਰੇ ਇਹ ਵਿਗਿਆਨ ਮਨੁੱਖ ਨੂੰ ਮਸ਼ੀਨ ਅਤੇ ਇਸ ਦੇ ਵੱਖ ਵੱਖ ਅੰਗਾਂ ਨੂੰ ਪੁਰਜ਼ੇ ਤਸੱਵੁਰ ਕਰਦੀ ਹੈ; ਹਾਲਾਂਕਿ ਹਕੀਕਤ ਵਿਚ ਸਰੀਰ ਕੋਈ ਮਸ਼ੀਨ ਹੈ ਹੀ ਨਹੀਂ। ਸਰੀਰ ਇਕੱਲਾ ਇਕਹਿਰਾ ਨਹੀਂ ਸਗੋਂ ਇਹ ਤਾਂ ਮਨ ਨਾਲ ਜੁੜਿਆ ਹੈ। ਇਨ੍ਹਾਂ ਦਾ ਆਪਸੀ ਸਰਗਰਮ ਦੁਵੱਲਾ ਸਬੰਧ ਜੱਗ ਜ਼ਾਹਿਰ ਹੈ।

 
 

ਨਵੀਂ ਦਿੱਲੀ, ਭਾਰਤ

ਬਰਲਿਨ, ਜਰਮਨੀ

ਵੀਡੀਓ ਗੈਲਰੀ
ਜਨਮ ਦਿਨ
 
 
 
ਅਹਿਮ ਸੂਚਨਾ
ਪੰਜਾਬੀ ਟਾਈਮਜ ਵਿਚ ਪ੍ਰਕਾਸ਼ਿਤ ਖਬਰਾਂ ਤੇ ਫੋਟੋ ਸਬੰਧੀ ਸਾਰੇ ਅਧਿਕਾਰ ਅਦਾਰੇ ਪਾਸ ਰਾਖਵੇ ਹਨ| ਇਸ ਵਿਚੋਂ ਕੋਈ ਵੀ ਖਬਰ ਅਤੇ ਫੋਟੋ ਲੈਣ ਤੋਂ ਪਹਿਲਾਂ ਅਦਾਰੇ ਦੀ ਮੰਜੂਰੀ ਲੈਣਾ ਲਾਜਮੀ ਹੈ| ਅਜਿਹਾ ਨਾ ਕਰਨ ਵਾਲੇ ਖਿਲਾਫ਼ ਕਾਰਵਾਈ ਕੀਤੀ ਜਾਵੇਗੀ|
ਮੁਖ ਸੰਪਾਦਕ, ਪੰਜਾਬੀ ਟਾਇਮਸ
Notice
Readers are recommended to make appropriate enquires and seek appropriate advice before sending money, incurring any expense, acting on medical recommendations or entering into any commitment in related to any advertisement published in this site . Panjabitimes.com website doesn't vouch for any claims made by the advertisers of product and services. We do not take any responsibility regarding advertisement. Panjabitimes.com website shall not be held liable for any consequences; in the event such claims are note honoured by the advertisers.
Chief Editor, Panjabi Times
Visitor's Counter :   0074512020
Copyright © 2019, Panjabi Times. All rights reserved. Website Designed by Mozart Infotech